Skip to content
PodcastsReligionRajat Jain 🚩 #Chanting and #Recitation of #Jain & #Hindu #Mantras and #Prayers

Rajat Jain 🚩 #Chanting and #Recitation of #Jain & #Hindu #Mantras and #Prayers

Rajat Jain
Rajat Jain 🚩 #Chanting and #Recitation of #Jain & #Hindu #Mantras and #Prayers
Latest episode

828 episodes

  • Rajat Jain 🚩 #Chanting and #Recitation of #Jain & #Hindu #Mantras and #Prayers

    Hanumat Dashak हनुमान दशक

    16/07/2026 | 2 mins.
    Hanumat Dashak हनुमान दशक

    संकट हर सुख देत है, पवन तनय हनुमान।
    राम भक्त बजरंगबली, बुद्धि बलज्ञान निधान ॥1 ॥

    बालपन में सूर्य को, ग्रस लियो हनुमन्त ।
    देवन की सुन विनय को, कष्ट हरे बलवन्त ।।2 ।।

    बाली के भय से छिपे, गिरि में जा सुग्रीव।
    मरवा बाली राम से, कीन सुखी निज पीव ॥3 ॥

    लख चिन्ता में सैन को, कहा ऋशेश्वर टेर।
    पार गये तब सिन्धु से, कष्ट हरा सब केर ॥4॥

    सुरसा का मद चूर कर, पुनि लंकिन को मार।
    दर्श विभीषण को दिखा, पहुंचे बाग मंझार ॥5॥

    विरह व्याकुल समय जब, मांगे रुख से आग।
    शोक हरा तब सीय का, दे मुन्दरी पद लाग ॥6॥

    बाग उजाड़िया अखेय हन, दीनि लंका जार।
    दीना धीरज राम को, आके पवन कुमार ॥7॥

    लक्ष्मण मूर्छित जब भये, लाये वैद्य सुषेण।
    ला दीनी सन्जीवनी, लक्ष्मण पाया चैन ॥8 ॥

    नांग फास में फंस गए, राम सहित सब वीर।
    हनुमत लाये गरुड़ को, काटी सब की पीर ॥9॥

    राम लक्ष्मण को ले गये, अहिरावण पाताल।
    मारे सैन सहित सिंह, दीना सूख विशाल ।॥ 10 ॥

    पढ़त दशक हनुमन्त का, जो जन मन चित्त लाय। "
    बसन्त" तांके काज सब, सिद्ध करत कपिराय ।॥

    🕉🟨🕉🟨🕉🟨
  • Rajat Jain 🚩 #Chanting and #Recitation of #Jain & #Hindu #Mantras and #Prayers

    Lajja Gauri Stotra लज्जा गौरी स्तोत्र

    24/06/2026 | 1 mins.
    Lajja Gauri Stotra लज्जा गौरी स्तोत्र

    नमस्ते विश्वजननि सृष्टिस्थित्यन्तकारिणि।
    कमलासनसंयुक्ते लज्जागौरि नमोऽस्तु ते॥
    त्वं माता सर्वलोकानां त्वं शक्तिः परमेश्वरी।
    त्वया धृतं जगत्सर्वं लज्जागौरि नमोऽस्तु ते॥
    सर्वसंपत्प्रदे देवि पुत्रपौत्रप्रवर्धिनि।
    धनधान्यसमायुक्ते लज्जागौरि नमोऽस्तु ते॥
    कामदा मोक्षदा चैव भुक्तिमुक्तिप्रदायिनी।
    भक्तानुग्रहकर्त्री त्वं लज्जागौरि नमोऽस्तु ते॥
    पद्ममुखि पद्महस्ते पद्मगर्भे शुभप्रदे।
    सृष्टिबीजस्वरूपे त्वं लज्जागौरि नमोऽस्तु ते॥
    या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता।
    नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

    ००००००००००००००००
  • Rajat Jain 🚩 #Chanting and #Recitation of #Jain & #Hindu #Mantras and #Prayers

    Sri Parvathi Shakthi Tandav Stuti श्री पार्वती शक्ति तांडव स्तुति

    08/06/2026 | 6 mins.
    श्री पार्वती शक्ति तांडव स्तुति

    कुचेल-केश-पाश-बद्ध-मल्लिका-सुगन्धिनी, उमेश-वाम-भाग-नित्य-केलि-कंज-धारिणी। अशोक-पुष्प-पल्लवैः सु-रञ्जित-स्व-मूर्धनी, करोतु शक्ति-ताण्डवं सदा शिवा भवानी ॥1॥

    ललाट-बिन्दु-सिन्धु-रक्त रञ्जिता स्व-भालका, धनुर्धरा त्रिशूलिनी कपाल-पाश-धारिणी। कराल-काल-मर्दिनी समस्त-दुःख-हारिणी, नमामि शैल-पुत्रिणीं सदा शिवा भवानी ॥2॥

    रणत्-क्वणत्-कणत्-किङ्किणी-नूपुर-घोष-मण्डिता, चलत्-चलत्-पद-क्रमैः सु-विश्व-चक्र-चालिनी। अघोर-रूप-धारिणी घोर-शत्रु-घातिनी, प्रचण्ड-शक्ति-रूपिणी सदा शिवा भवानी ॥3॥

    जगज्जननी पावनी प्रसन्न मन्द-हासिनी, सु-भक्त-वृन्द-वन्दिता समस्त-विघ्न-नाशिनी। प्रलय-वह्नि-रञ्जिता महानिभय-दायिनी, जयतु जयतु पार्वती सदा शिवा भवानी ॥4॥

    जटा-कटाह-संभ्रम-भ्रमन्-निलिम्पनिर्झरी, विलोम-शक्ति-रूपिणी कराल-खड्ङ्ग-धारिणी। धगद् धगद् धगज्-ज्वलत्-ललाट-पट्ट-पावके, किशोर-चन्द्र-शेखरे रतिं प्रतिक्षणं मम ॥5॥

    महा-विचित्र-नृत्त-नाद-डम्ब-डम्ब डम्बिका,
    प्रचण्ड-मुण्ड-मण्डली-गले-विराज-मालिका।
    दश-दिगन्त-गामिनी सु-तेज-पुञ्ज-भासिनी,
    पुनातु माँ सदा-सदा उमा-महेश्वरी विभू ॥6॥

    नितम्ब-चन्द्र-कान्ति-कान्त मेखला-सु-शोभिनी,
    कराल-दंष्ट्र-भास्वरा सु-जिह्व-रक्त-रञ्जिता।
    महिष-दैत्य-मर्दिनी सुरेन्द्र-दुःख-भञ्जिनी,
    जयतु शैल-नन्दिनी शिवा-शवा-विहारिणी ॥7॥

    नवाक्षर-मन्त्र-मयी त्रिनेत्र-तेज-दायिनी, कुलाकुल-स्वरूपिणी महा-विपत्ति-हारिणी। समस्त-सिद्ध-योगिनी गणेश्वर-प्रमोदिनी, भजामि दिव्य-पार्वतीं शिव-प्रिया-मनोहराम् ॥৪॥

    प्रफुल्ल-नील-पङ्कज-प्रपञ्च-कालिम-प्रभा-वलम्बि-कण्ठ-कन्दली-रुचि प्रबद्ध कन्धरम्। स्मरच्छिदं पुरच्छिदं भवच्छिदं मखच्छिदं गजाम्विका-वृषध्वजं नमामि शम्भु-सुन्दरीम् ॥9॥

    क्वचिद्-दिगम्बरी-छटा-विचित्र-रूप-धारिणी, क्वचिद्-मृणाल-कोमला सु-पुष्प-हार-धारिणी। क्वचिद्-महा-भयङ्करा कराल-काल-रूपिणी, नमामि तां जगन्मयीं शिवा-सखीं सु-पावनीम् ॥10॥

    रणत् मृदङ्ग शङ्ख नाद घोर श ब्द मण्डिता, चलत् कपाल कुण्डला फणा मणि विभूषिता। धनु र्विमुक्त सायकैः सुरारि सैन्य दारिणी, प्रचण्ड चण्ड नन्दिनीं नमामि दैत्य हारिणीम् ॥11॥

    नृमुण्ड माल मण्डिता विशीर्ण केस पाशिका, कराल लोल जिह्विका त्रिलोक त्रास नाशिनी। महा कपाल पात्र गा सु रक्त पान कारिणी, जयत्य मेघ सुन्दरी महा धमाधम ध्वनिः ।॥12॥

    समस्त शक्ति चक्र गा सु बिन्दु मध्य वासिनी, षडब्ज भेदिनी मुदा महा सुषुम्न वाहिनी। महा प्रकाश पुञ्जिका शिव स्वरुप कारिणी, मनस्विनि नमोऽस्तुते प्रपन्न भक्त तारिणी ॥13॥

    अखण्ड शक्ति मण्डले सदैव काल कालिनी, विचित्र सृष्टि कारिणी सदा सु मङ्गल प्रदा। इदं हि नित्य मेव मुक्त मुत्तमोत्तमं स्तवं, पठन् स्मरन् ब्रुवन् नरो विशुद्धिमेति संततम् ॥14॥

    नमस्ते नमस्ते महा शक्ति रूपे, नमस्ते नमस्ते शिवे शान्त रूपे। नमस्ते नमस्ते जगद् व्याप्त देहे, नमस्ते नमस्ते नमस्ते नमस्ते ॥15॥
  • Rajat Jain 🚩 #Chanting and #Recitation of #Jain & #Hindu #Mantras and #Prayers

    Sri Parvathi Shakthi Tandav Stuti श्री पार्वती शक्ति तांडव स्तुति

    06/06/2026 | 6 mins.
    श्री पार्वती शक्ति तांडव स्तुति

    कुचेल-केश-पाश-बद्ध-मल्लिका-सुगन्धिनी,
    उमेश-वाम-भाग-नित्य-केलि-कंज-धारिणी।
    अशोक-पुष्प-पल्लवैः सु-रञ्जित-स्व-मूर्धनी,
    करोतु शक्ति-ताण्डवं सदा शिवा भवानी ॥1॥

    ललाट-बिन्दु-सिन्धु-रक्त रञ्जिता स्व-भालका,
    धनुर्धरा त्रिशूलिनी कपाल-पाश-धारिणी।
    कराल-काल-मर्दिनी समस्त-दुःख-हारिणी,
    नमामि शैल-पुत्रिणीं सदा शिवा भवानी ॥2॥

    रणत्-क्वणत्-कणत्-किङ्किणी-नूपुर-घोष-मण्डिता,
    चलत्-चलत्-पद-क्रमैः सु-विश्व-चक्र-चालिनी।
    अघोर-रूप-धारिणी घोर-शत्रु-घातिनी,
    प्रचण्ड-शक्ति-रूपिणी सदा शिवा भवानी ॥3॥

    जगज्जननी पावनी प्रसन्न मन्द-हासिनी,
    सु-भक्त-वृन्द-वन्दिता समस्त-विघ्न-नाशिनी।
    प्रलय-वह्नि-रञ्जिता महानिभय-दायिनी,
    जयतु जयतु पार्वती सदा शिवा भवानी ॥4॥

    जटा-कटाह-संभ्रम-भ्रमन्-निलिम्पनिर्झरी,
    विलोम-शक्ति-रूपिणी कराल-खड्ङ्ग-धारिणी।
    धगद् धगद् धगज्-ज्वलत्-ललाट-पट्ट-पावके,
    किशोर-चन्द्र-शेखरे रतिं प्रतिक्षणं मम ॥5॥

    महा-विचित्र-नृत्त-नाद-डम्ब-डम्ब डम्बिका,
    प्रचण्ड-मुण्ड-मण्डली-गले-विराज-मालिका।
    दश-दिगन्त-गामिनी सु-तेज-पुञ्ज-भासिनी,
    पुनातु माँ सदा-सदा उमा-महेश्वरी विभू ॥6॥

    नितम्ब-चन्द्र-कान्ति-कान्त मेखला-सु-शोभिनी,
    कराल-दंष्ट्र-भास्वरा सु-जिह्व-रक्त-रञ्जिता।
    महिष-दैत्य-मर्दिनी सुरेन्द्र-दुःख-भञ्जिनी,
    जयतु शैल-नन्दिनी शिवा-शवा-विहारिणी ॥7॥

    नवाक्षर-मन्त्र-मयी त्रिनेत्र-तेज-दायिनी,
    कुलाकुल-स्वरूपिणी महा-विपत्ति-हारिणी।
    समस्त-सिद्ध-योगिनी गणेश्वर-प्रमोदिनी,
    भजामि दिव्य-पार्वतीं शिव-प्रिया-मनोहराम् ॥৪॥

    प्रफुल्ल-नील-पङ्कज-प्रपञ्च-कालिम-प्रभा-
    वलम्बि-कण्ठ-कन्दली-रुचि प्रबद्ध कन्धरम्।
    स्मरच्छिदं पुरच्छिदं भवच्छिदं मखच्छिदं
    गजाम्विका-वृषध्वजं नमामि शम्भु-सुन्दरीम् ॥9॥

    क्वचिद्-दिगम्बरी-छटा-विचित्र-रूप-धारिणी,
    क्वचिद्-मृणाल-कोमला सु-पुष्प-हार-धारिणी।
    क्वचिद्-महा-भयङ्करा कराल-काल-रूपिणी,
    नमामि तां जगन्मयीं शिवा-सखीं सु-पावनीम् ॥10॥

    रणत् मृदङ्ग शङ्ख नाद घोर श ब्द मण्डिता,
    चलत् कपाल कुण्डला फणा मणि विभूषिता।
    धनु र्विमुक्त सायकैः सुरारि सैन्य दारिणी,
    प्रचण्ड चण्ड नन्दिनीं नमामि दैत्य हारिणीम् ॥11॥

    नृमुण्ड माल मण्डिता विशीर्ण केस पाशिका,
    कराल लोल जिह्विका त्रिलोक त्रास नाशिनी।
    महा कपाल पात्र गा सु रक्त पान कारिणी,
    जयत्य मेघ सुन्दरी महा धमाधम ध्वनिः ।॥12॥

    समस्त शक्ति चक्र गा सु बिन्दु मध्य वासिनी,
    षडब्ज भेदिनी मुदा महा सुषुम्न वाहिनी।
    महा प्रकाश पुञ्जिका शिव स्वरुप कारिणी,
    मनस्विनि नमोऽस्तुते प्रपन्न भक्त तारिणी ॥13॥

    अखण्ड शक्ति मण्डले सदैव काल कालिनी,
    विचित्र सृष्टि कारिणी सदा सु मङ्गल प्रदा।
    इदं हि नित्य मेव मुक्त मुत्तमोत्तमं स्तवं,
    पठन् स्मरन् ब्रुवन् नरो विशुद्धिमेति संततम् ॥14॥

    नमस्ते नमस्ते महा शक्ति रूपे, नमस्ते नमस्ते शिवे शान्त रूपे। नमस्ते नमस्ते जगद् व्याप्त देहे, नमस्ते नमस्ते नमस्ते नमस्ते ॥15॥
  • Rajat Jain 🚩 #Chanting and #Recitation of #Jain & #Hindu #Mantras and #Prayers

    Bala Krishna Ashtakam बालकृष्ण अष्टकम्

    29/03/2026 | 3 mins.
    Bala Krishna Ashtakam बालकृष्ण अष्टकम्

    श्रीमन्नन्दयशोदा हृदयस्थित भावतत्परो भगवान् ।
    पुत्रीकृत निजरूपः स जयति पुरतः कृपालुर्बालकृष्णः ॥ १॥

    कथमपि रिङ्गणम करोद ङ्गणगतजानु घर्षणोद्युक्तः ।
    कटितटकिङ्किणि जालस्वन शङ्कितमानसः सदा ह्यास्ते ॥ २॥

    विकसितपङ्कज नयनः प्रकटित हर्षः सदैव धूसराङ्गः ।
    परिगच्छति कटिभङ्ग प्रसरीकृत पाणियुग्माभ्याम् ॥ ३॥

    उपलक्षित दधिभाण्डः स्फुरितब्रह्माण्ड विग्रहो भुङ्क्ते ।
    मुष्टीकृतनवनीतः परमपुनीतो मुग्धभावात्मा ॥ ४॥

    नम्रीकृतविधुवदनः प्रकटीकृत चौर्यगोपनायासः ।
    स्वाम्बोत् सङ्गविलासः क्षुधितः सम्प्रति दृश्यते स्तनार्थी ॥ ५॥

    सिंहनखाकृति भूषणभूषित हृदयः सुशोभते नित्यम् ।
    कुण्डलमण्डितगण्डः साञ्जन नयनो निरञ्जनः शेते ॥ ६॥

    कार्यासक्त यशोदागृह कर्मावरोधकः सदाऽऽस्ते ।
    तस्याः स्वान्त निविष्ट प्रणय प्रभाजनो यतोऽयम् ॥ ७॥

    इत्थं व्रजपति तरुणी नमनीयं ब्रह्मरुद्राद्यैः ।
    कमनीयं निजसूनुं लालयति स्म प्रत्यहं प्रीत्या ॥ ८॥

    श्रीमद्वल्लभ कृपया विशदीकृतम एतदष्टकं पठेद्यः ।
    तस्य दयानिधिकृष्णे भक्तिः प्रेमैकलक्षणा शीघ्रम् ॥ ९॥

    इति श्रीकृष्णदासकृतं बालकृष्णाष्टकं सम्पूर्णम् ।
More Religion podcasts
About Rajat Jain 🚩 #Chanting and #Recitation of #Jain & #Hindu #Mantras and #Prayers
Chanting And Recitation Of Jain & Hindu Mantras And Prayers.
Podcast website

Listen to Rajat Jain 🚩 #Chanting and #Recitation of #Jain & #Hindu #Mantras and #Prayers, Pastor Rick's Daily Hope and many other podcasts from around the world with the radio.net app

Get the free radio.net app

  • Stations and podcasts to bookmark
  • Stream via Wi-Fi or Bluetooth
  • Supports Carplay & Android Auto
  • Many other app features
Rajat Jain 🚩 #Chanting and #Recitation of #Jain & #Hindu #Mantras and #Prayers: Podcasts in Family