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- शिव पुराण अध्याय 52 में शिव-पार्वती विवाह के बाद भगवान शिव और बारातियों के आदर-सत्कार, भोजन और महादेव के दिव्य आवासगृह में शयन की कथा का वर्णन मिलता है।
शैलराज हिमालय सभी देवी-देवताओं, ऋषि-मुनियों, शिवगणों, भगवान विष्णु और भगवान शिव के लिए भोजन की व्यवस्था करते हैं। इसके बाद भगवान शिव को एक सुंदर और रत्नों से सुसज्जित वासभवन में ले जाया जाता है। विश्वकर्मा द्वारा निर्मित इस अद्भुत भवन में भगवान शिव रात्रि विश्राम करते हैं।
प्रातःकाल पुनः मंगल-ध्वनि और शिव-विवाह का उत्सव आरंभ होता है। धर्मदेव भगवान शिव को जनवासे में पधारने का संदेश देते हैं। इसके बाद महादेव गिरिराज हिमालय और मैना से आज्ञा लेकर जनवासे की ओर प्रस्थान करते हैं। शिव पुराण - रति की प्रार्थना पर कामदेव को मिला जीवनदान | श्री रुद्र संहिता - अध्याय 51
04/10/2026 | 5 mins.शिव पुराण अध्याय 51 में देवी रति भगवान शिव से अपने पति कामदेव को पुनर्जीवित करने की करुण प्रार्थना करती हैं। देवी रति की प्रार्थना और स्तुति से प्रसन्न होकर भगवान शिव कामदेव को जीवनदान देते हैं।
कामदेव पुनः पहले की भांति सुंदर और स्वस्थ रूप में प्रकट होते हैं। रति और कामदेव भगवान शिव की स्तुति करते हैं और कामदेव महादेव से अपने अपराध के लिए क्षमा मांगते हैं। भगवान शिव प्रसन्न होकर उन्हें आशीर्वाद प्रदान करते हैं।
इस अध्याय में सुनिए रति की प्रार्थना, कामदेव का पुनर्जीवन, भगवान शिव का वरदान और शिव-पार्वती विवाह के बाद की पावन कथा।शिव-पार्वती विवाह संपन्न और शिवजी से हास्य-विनोद | शिव पुराण | श्री रुद्र संहिता -अध्याय 50
27/09/2026 | 5 mins.श्री शिव पुराण के अध्याय 50 में भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह के शेष मंगल कार्यों का वर्णन मिलता है। विवाह की विधियां पूर्ण होने के बाद भगवान शिव माता पार्वती की मांग में सिंदूर भरते हैं और शिव-पार्वती विवाह विधि-विधान से संपन्न होता है।
इसके बाद सरस्वती, लक्ष्मी, सावित्री, गंगा, अरुंधती, अहिल्या, तुलसी सहित अनेक देवियां भगवान शिव और माता पार्वती के पास आती हैं और महादेव से हास्य-विनोद करती हैं। यह अध्याय शिव-पार्वती विवाह के आनंदमय और विनोदपूर्ण प्रसंग का सुंदर वर्णन प्रस्तुत करता है।शिव पुराण | ब्रह्माजी का मोहित होना | भगवान शिव का क्रोध | श्री रुद्र संहिता - अध्याय 49
25/09/2026 | 2 mins.शिव पुराण के उनचासवें अध्याय (अध्याय 49) में शिव-पार्वती विवाह के दौरान घटित एक महत्वपूर्ण प्रसंग का वर्णन है। विवाह की विधियां पूरी करते समय ब्रह्माजी देवी पार्वती के दिव्य स्वरूप को देखकर मोहित हो जाते हैं। भगवान शिव उनके मन के भावों को जान लेते हैं और अत्यंत क्रोधित हो जाते हैं।
देवताओं द्वारा भगवान शिव की स्तुति और क्षमा-प्रार्थना करने पर उनका क्रोध शांत होता है। इसी प्रसंग में बालखिल्य ऋषियों की उत्पत्ति और उनके गंधमादन पर्वत पर जाकर सूर्य भगवान की आराधना एवं तपस्या करने का वर्णन भी मिलता है।
इस अध्याय में सुनिए: शिव-पार्वती विवाह, ब्रह्माजी का मोहित होना, भगवान शिव का क्रोध, देवताओं की प्रार्थना, ब्रह्माजी को क्षमा और बालखिल्य ऋषियों की उत्पत्ति का प्रसंग।- श्री शिव पुराण अध्याय 48 में भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह के आरंभ, भगवान शिव के कुल-गोत्र के रहस्य, माता पार्वती के कन्यादान और शिव-पार्वती के पाणिग्रहण की मंगलमयी कथा का वर्णन है।
विवाह की रस्मों के दौरान शैलराज हिमालय भगवान शिव से उनके कुल, गोत्र, प्रवर और वेद शाखा का परिचय पूछते हैं। भगवान शिव मौन रहते हैं। तब नारद जी बताते हैं कि भगवान शिव निर्गुण, निराकार, परमब्रह्म और परमेश्वर हैं। उनका गोत्र और कुल नाद है—शिव नादमय हैं और नाद शिवमय है।
इसके बाद हिमालय और मैना अपनी पुत्री पार्वती का विधिपूर्वक कन्यादान करते हैं। भगवान सदाशिव माता पार्वती का पाणिग्रहण स्वीकार करते हैं और चारों ओर शिव-पार्वती की जय-जयकार होने लगती है। गंधर्व गीत गाते हैं, अप्सराएं नृत्य करती हैं और देवता प्रसन्न होते हैं।
शैलराज हिमालय भगवान शिव को अनेक बहुमूल्य वस्तुएं भेंट करते हैं और संपूर्ण हिमालय नगरी शिव-पार्वती के दिव्य विवाह के उत्सव में आनंदित हो उठती है।
🙏 शिव-पार्वती की इस मंगलमयी विवाह कथा का श्रवण करें और महादेव एवं माता पार्वती का आशीर्वाद प्राप्त करें।
हर हर महादेव 🔱
ॐ नमः शिवाय 🙏
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About Shiv Puran Katha in Hindi
शिव पुराण सभी पुराणों में सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण व सबसे ज्यादा पढ़ी जाने वाली पुराणों में से एक है। भगवान शिव के विविध रूपों, अवतारों, ज्योतिर्लिंगों, भक्तों और भक्ति का विशद् वर्णन किया गया है।इसमें शिव के कल्याणकारी स्वरूप का तात्त्विक विवेचन, रहस्य, महिमा और उपासना का विस्तृत वर्णन है। शिव पुराण में शिव को पंचदेवों में प्रधान अनादि सिद्ध परमेश्वर के रूप में स्वीकार किया गया है। शिव-महिमा, लीला-कथाओं के अतिरिक्त इसमें पूजा-पद्धति, अनेक ज्ञानप्रद आख्यान और शिक्षाप्रद कथाओं का सुन्दर संयोजन है। इसमें भगवान शिव के भव्यतम व्यक्तित्व का गुणगान किया गया है। शिव- जो स्वयंभू हैं, शाश्वत हैं,
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