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Shiv Puran Katha in Hindi

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Shiv Puran Katha in Hindi
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  • Shiv Puran Katha in Hindi

    देवताओं का शिवजी के पास जाना | शिव पुराण - श्रीरुद्र संहिता - अध्याय 22

    09/03/2026 | 6 mins.
    शिव पुराण के बाईसवें अध्याय में देवताओं पर आए संकट का वर्णन मिलता है। तारकासुर के अत्याचार से परेशान होकर सभी देवता भगवान शिव की शरण में जाते हैं।
    भगवान विष्णु, ब्रह्मा और अन्य देवताओं के साथ मिलकर शिवजी से प्रार्थना की जाती है कि वे पार्वती जी से विवाह करें ताकि उनके पुत्र द्वारा तारकासुर का वध हो सके।
    यह अध्याय भक्ति, श्रद्धा और ईश्वर की शरणागति का सुंदर उदाहरण प्रस्तुत करता है।
    📌 इस वीडियो में जानिए:
    तारकासुर कौन था?

    देवता क्यों भयभीत हुए?

    शिवजी ने क्या उत्तर दिया?

    शिव विवाह का रहस्य क्या है?

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  • Shiv Puran Katha in Hindi

    पार्वती की तपस्या - शिव पुराण - श्रीरुद्र संहिता | अध्याय 21

    01/03/2026 | 5 mins.
    शिव पुराण का इक्कीसवां अध्याय देवी पार्वती की अद्भुत, कठोर और अलौकिक तपस्या का विस्तृत वर्णन प्रस्तुत करता है। भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के संकल्प के साथ पार्वती सांसारिक सुखों का त्याग कर गंगोत्री तीर्थ में घोर तपस्या आरंभ करती हैं।
    वे पंचाक्षर मंत्र ‘ॐ नमः शिवाय’ का निरंतर जप करती हैं। फलाहार से प्रारंभ होकर पत्तों के त्याग और अंततः निराहार साधना तक उनकी तपस्या बढ़ती जाती है। भोजन त्याग देने के कारण देवताओं द्वारा उन्हें ‘अपर्णा’ नाम दिया जाता है।
    तीन हजार वर्षों तक की गई यह तपस्या न केवल ऋषि-मुनियों के लिए आश्चर्यजनक थी, बल्कि संपूर्ण प्रकृति को भी पवित्र और दिव्य बना देती है। यह अध्याय भक्ति, संयम, धैर्य और शिव-प्राप्ति के लिए आत्मसमर्पण का दिव्य संदेश देता है।
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    शिवजी के वियोग में पार्वती का शोक और तपस्या का आरंभ - शिव पुराण | श्रीरुद्र संहिता -अध्याय 20

    22/02/2026 | 6 mins.
    शिव पुराण का बीसवां अध्याय देवी पार्वती के गहन शोक, विरह और आत्मचिंतन का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन प्रस्तुत करता है। कामदेव के भस्म होने के बाद पार्वती का हृदय शिव-वियोग से व्याकुल हो उठता है। यह अध्याय बताता है कि किस प्रकार देवी पार्वती सांसारिक सुखों से विरक्त होकर भगवान शिव को पुनः प्राप्त करने हेतु कठोर तपस्या का संकल्प लेती हैं।
    इस अध्याय में भक्ति, वैराग्य, आत्मसंयम और तप की महिमा का विस्तार से वर्णन है, जो साधकों को यह सिखाता है कि अहंकार के त्याग और शुद्ध भक्ति से ही ईश्वर की प्राप्ति संभव है। बीसवां अध्याय शिव-भक्तों के लिए आध्यात्मिक मार्गदर्शन और प्रेरणा का स्रोत है।
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    शिव क्रोधाग्नि की शांति- शिव पुराण - कामदेव भस्म कथा | श्रीरुद्र संहिता - अध्याय 19

    15/02/2026 | 2 mins.
    शिव पुराण का उन्नीसवाँ अध्याय बताता है कि कैसे भगवान शिव के तीसरे नेत्र से उत्पन्न क्रोधाग्नि से कामदेव भस्म हो गए और ब्रह्मा जी ने उस अग्नि को समुद्र में सुरक्षित रखकर सृष्टि की रक्षा की। यह अध्याय शिव के रौद्र और करुणामय स्वरूप का अद्भुत वर्णन करता है।

    शिव पुराण अध्याय 19

    शिव क्रोधाग्नि की शांति

    कामदेव भस्म कथा

    भगवान शिव तीसरा नेत्र

    शिव पुराण हिंदी

    शिव क्रोध कथा

    समुद्र में क्रोधाग्नि

    ब्रह्मा और शिव कथा
  • Shiv Puran Katha in Hindi

    कामदेव का भस्म होना - शिव पुराण - श्रीरुद्र संहिता - अध्याय 18

    08/02/2026 | 7 mins.
    शिव पुराण का अठारहवाँ अध्याय एक अत्यंत मार्मिक और दिव्य प्रसंग प्रस्तुत करता है, जिसमें कामदेव भगवान शिव को मोहित करने के प्रयास में उनके तीसरे नेत्र की अग्नि से भस्म हो जाते हैं। इस अध्याय में भगवान शिव की कठोर तपस्या, कामदेव द्वारा चलाए गए बाणों का निष्फल होना, रति का विलाप तथा देवताओं की करुण प्रार्थना का विस्तार से वर्णन मिलता है। यह कथा वैराग्य, संयम, तपस्या और अहंकार के नाश का गहरा आध्यात्मिक संदेश देती है। शिव पुराण का यह अध्याय बताता है कि ब्रह्मांड की शक्तियाँ भी भगवान शिव की इच्छा और तप के सामने क्षीण हैं। कामदेव का भस्म होना केवल विनाश नहीं, बल्कि धर्म और संतुलन की स्थापना का प्रतीक है।

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About Shiv Puran Katha in Hindi

शिव पुराण सभी पुराणों में सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण व सबसे ज्यादा पढ़ी जाने वाली पुराणों में से एक है। भगवान शिव के विविध रूपों, अवतारों, ज्योतिर्लिंगों, भक्तों और भक्ति का विशद् वर्णन किया गया है।इसमें शिव के कल्याणकारी स्वरूप का तात्त्विक विवेचन, रहस्य, महिमा और उपासना का विस्तृत वर्णन है। शिव पुराण में शिव को पंचदेवों में प्रधान अनादि सिद्ध परमेश्वर के रूप में स्वीकार किया गया है। शिव-महिमा, लीला-कथाओं के अतिरिक्त इसमें पूजा-पद्धति, अनेक ज्ञानप्रद आख्यान और शिक्षाप्रद कथाओं का सुन्दर संयोजन है। इसमें भगवान शिव के भव्यतम व्यक्तित्व का गुणगान किया गया है। शिव- जो स्वयंभू हैं, शाश्वत हैं,
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